Tuesday, February 27, 2018 लाइक्रा नहीं है हर नायक की पहचान

इब्राहिम थियॉ, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के उपकार्यकारी निदेशक और संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव

القصص

इब्राहिम थियॉ, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के उपकार्यकारी निदेशक और संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव

इब्राहिम थियॉ, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के उपकार्यकारी निदेशक और संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव

जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल की 30वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में आयोजित All4TheGreen: जलवायु विज्ञान संगठन सम्मेलन का उद्घाटन भाषण

बलोनी, इटली 26 फरवरी 2018

जैसे हम इस खूबसूरत बलोनी शहर में वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नेतृत्व के क्षेत्र में आईपीसीसी के 30 वर्ष मनाने के लिए एकत्र हुए हैं, उसी प्रकार मानवाधिकार परिषद जेनेवा में एकत्रित हो रही है।

भले ही हम 600 मील दूर मिल रहे हों, लेकिन हमारे लक्ष्य, हमारी चिंताएं और हमारी प्राथमिकताएं बहुत समान हैं। क्योंकि वह परिषद मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा की 70वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एकत्रित हो रही है और जिस प्रकार जलवायु परिवर्तन का प्रभाव गंभीर होता जा रहा है, उन मूलभूत अधिकारों की रक्षा कर पाना हमारे लिए चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। स्वास्थ्य और सुख के लिए पर्याप्त जीवन स्तर का अधिकार;

संपत्ति का अधिकार; आने-जाने की स्वतंत्रता का अधिकार – इन सभी को देखने का नज़रिया तब बदल जाता है जब एक बढ़ती जनसंख्या के सामने गर्म होते सागरों, घटती जमीन, कम होते संसाधनों और क्रूर होती मौसमी घटनाओं जैसी समस्याएं आती हैं।

उद्घोषणा पर हस्ताक्षर होने के बाद, पिछले 70 वर्षों में कम से कम 40% गृह युद्धों का संबंध प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ा पाया गया है। इसलिए, इस बात की कितनी संभावना है कि जलवायु पर दबाव बढ़ने के साथ इन जोखिमों में सुधार आएगा, वह भी ऐसी स्थिति में, जब पिछले दशक में लगभग हर दिन घटित होने वाली मौसम संबंधी आपदाओं ने, प्रति वर्ष औसतन 26 मिलियन लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर किया? जब, 2050 तक, लगभग 200 मिलियन लोग पर्यावरणीय कारणों के चलते विस्थापित होने को मजबूर हो जाएंगे या फिर तब, जब अगले कुछ दशकों के भीतर, इस ग्रह में हर 45वां इंसान अपना घर छोड़कर भटकने पर मजबूर हो जाएगा?

आंकड़े असीमित हैं और ये आसानी से स्तब्ध कर सकते हैं। जब तक आप या आपके चहेते लोग वह 45वां व्यक्ति नहीं बन जाएं। जैसा कि मेरे परिवार के साथ हुआ।

मॉरिटानिया में अस्सी के दशक में, भूमि और जल तक पहुंच को लेकर शुरू हुआ एक मामूली झगड़ा एक अंतर्राष्ट्रीय संघर्ष में बदल गया जिसने मुझे और मेरे परिवार को बेघर कर भटकने पर मजबूर कर दिया। मेरे पिता उन हज़ारों हज़ार लोगों में से थे, जिन्हें विस्थापित किया गया, राष्ट्रीयता नहीं दी गई और निर्वासित कर दिया गया – इससे सेनेगल नदी के दोनों तरफ रह रहे लोग प्रभावित हुए थे। आखिरकार उन्हें सेनेगल में एक शरणार्थी के रूप में स्वीकार कर लिया गया जहां पर उन्होंने एक नए जीवन की शुरुआत की। लेकिन दूसरे लोग इतने सौभाग्यशाली नहीं थे और उस क्षेत्र की भूमि सुधारने तथा आशा और विश्वास वापस लाने में पीढ़ियां लग जाएंगी।

हमारे इतालवी मेज़बान ऐसे विस्थापनों के अप्रत्यक्ष प्रभावों से भलीभांति परिचित हैं – वे फिर चाहें शरणार्थियों पर हों, या उन समुदायों पर जहां वे पुनर्स्थापित होकर बसते हैं या इन सब चीजों की देखभाल करने वाली इकाइयों पर हों।

लेक चैडबेसिन से लेकर लुसियाना बाययू तक और हजारों निचले द्वीपों तथा विकसित और विकासशील देशों के तटों पर रहने वाले समुदायों से आने वाले घरों की यही कहानी है।इसके किरदार वास्तविक लोग हैं न कि आंकड़े। और उन्हें किरदार बनना पड़ रहा है

क्योंकि जलवायु परिवर्तन से उनके अधिकारों और संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, जो आखिरकार संकट, संघर्ष और असमानता के नए मुद्दों को जन्म दे रहा है।

यह एक कुचक्र है – लेकिन इसे तोड़ा जा सकता है। आईपीसीसी में सैकड़ों अग्रणी वैज्ञानिकों के चलते, हम पुख्ता परिणामों का उपयोग कर ऐसी नीतियां बना सकते हैं जो जलवायु परिवर्तन से जुड़े विभिन्न जोखिमों का पूर्वानुमान लगा सकें, उन्हें कम कर सकें और उनके साथ तालमेल बिठा सकें।

संसार के महानतम वैज्ञानिक स्वेच्छा से अपना योगदान दे रहे हैं। यह वाकई प्रेरणादायक है। हॉलीवुड को यह बात पूरी तरह से समझ में नहीं आई – दुनिया बचाते समय हर नायक लाइक्रा के कपड़े नहीं पहनता। कभी-कभी वे लैब कोट भी पहनते हैं! क्योंकि भले ही अक्सर इसे पहचान न मिलती हो, लेकिन आईपीसीसी वैज्ञानिक समुदाय का निजी समर्पण वाकई वीरतापूर्ण है और उनके कार्य की महत्ता और गुणवत्ता में कुछ बेहद प्रतिभावान लोगों और टीमों की शक्ति और क्षमता झलकती है।

एक साथ मिलकर, वे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण की महासभाओं और जलवायु सम्मेलनों में लिए गए निर्णयों को आकार देते हैं। वे हर देश, हर क्षेत्र और जीवन के हर पहलू के नागरिकों, शिक्षकों और निर्णयकर्ताओं को जानकारी देते हैं और वे हमें इस विनाशकारी चक्र को तोड़ने के विकल्प देते हैं।

इसके अलावा, वे हमें इस चक्र को एक ऐसी ताकत में परिवर्तित करने के विकल्प देते हैं जो अधिक समान और सतत विकास सुनिश्चित कर सकती है। इसके साथ ही, अगले मूल्यांकन के लिए लेखकों की सूची को अंतिम रूप देने की तैयारी,, 1.50C ग्लोबल वॉर्मिंगपर अक्टूबर में आने वाली विशेष रिपोर्ट और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण की वार्षिक उत्सर्जन गैप (एमिशंस गैप) और अनुकूलन गैप (एडाप्टेशन गैप) रिपोर्ट सेमिलने वाले पूरक आंकड़ों के साथ, जलवायु विज्ञान के पास बहुत कुछ है जिसके आधार पर अत्यावश्यक नीतियों का निर्माण किया जा सकता है और बदलाव की उस शक्ति का सृजन किया जा सकता है।

इसके लिए हम उन सभी के बेहद आभारी हैं जिन्होंने पिछले 30 वर्षों में आईपीसीसी में और इसके साथ काम किया है।

मेरा मानना है कि सभी माता-पिता को अपनी संतान पर गर्व होता है। वे उन्हें इस तरह से समझदार होता और बड़ा होता देखना चाहते हैं ताकि वे अपने पीछे एक बेहतर दुनिया छोड़ सकेंI मॉरिटानिया छोड़ते समय मेरे पिता भी कुछ ऐसा ही चाहते थे। मेरा परिवार की भी ऐसी ही सोच है। और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण और विश्व मौसम संगठन के हमारे सहकर्मियों के लिए, आईपीसीसी भी ऐसा ही चाहता है। हम सब इस बात पर गर्व महसूस कर सकते हैं कि विश्व के नेता, उद्योग जगत के नेता और सामुदायिक नेता, आईपीसीसी द्वारा दिए गए पुख्ता वैज्ञानिक आंकड़ों पर आश्वस्त रहते हुए, जीवन परिवर्तित करने वाले निर्णय ले सकते हैं।

इसमें कोई शक नहीं है कि आने वाले वर्षों में विशेषज्ञों का विविधतापूर्ण पैनल इस तरह से विकसित होता रहेगा जिससे हम कुछ बड़ी चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। मैं स्वयं भी यह देखना चाहूंगा कि आपकी 70वीं वर्षगांठ आते-आते, आपके साहस पूर्ण प्रयास हमारे परिवारों और हमारे अधिकारों की रक्षा के लिए कितना कुछ कर सकते हैं!

धन्यवाद

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