Sunday, June 3, 2018 इस उद्यमी ने भारत में पर्यावरण के अनुकूल मेज़ पर खाने के बर्तन इत्यादि (टेबलवेयर) की शुरुआत की।

पानी की बोतलें, स्ट्रॉ, पॉलीस्टीरीन की प्लेटें जैसे एक बार उपयोग में आने वाले प्लास्टिक के उत्पाद हमारे आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, प्रतिवर्ष 30 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है, जिसमें से आधे का केवल एक बार ही उपयोग होता है।

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पानी की बोतलें, स्ट्रॉ, पॉलीस्टीरीन की प्लेटें जैसे एक बार उपयोग में आने वाले प्लास्टिक के उत्पाद हमारे आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। शोधकर्ताओं के अनुमान के मुताबिक, प्रतिवर्ष 30 करोड़ टन प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है, जिसमें से आधे का केवल एक बार ही उपयोग होता है।

लेकिन यह ज़रूरी नहीं है कि ऐसा होता रहे। यकीन नहीं होता तो रिया सिंघल से पूछें।

दिल्ली की रहने वाली सिंघल मात्र 27 साल की थीं जब उन्होंने प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की जंग में शामिल होने के लिए अपना कैरियर छोड़ दिया था। औषध विज्ञान की डिग्री और एक बड़ी दवाई कंपनी के लिए मार्केटिंग में अपने काम के अनुभव के साथ, सिंघल ने 2009 में अपना खुद का व्यवसाय इकोवेयर (Ecoware) शुरू किया।

यह कंपनी प्लेट, कप, कटोरे, ट्रे, छुरी-चम्मचें और अन्य उत्पाद बनाती है। इन सभी को पौधों के जैव ईंधन से बनाया जाता है और ये सभी 100 प्रतिशत प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाले (बायोडिग्रेडेबल) होते हैं। एक दशक के भीतर ही, इकोवेयर देश में टेबलवेयर की आपूर्ति करने वाली सबसे बड़ी कंपनी बन गई है।

Rhea Singhal
रिया सिंघल (फ़ोर्ब्स)

रिया कहती हैं कि उनका लक्ष्य प्राकृतिक पर्यावरण को स्वच्छ बनाने के साथ ही साथ मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना है।

“नॉन-बायोडिग्रेडेबल कंटेनरों से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की जानकारी सभी को है,” वह कहती हैं। “यदि आप गर्म खाने को गर्म कंटेनर में रखते हैं, तो खाने के ज़रिए आपके शरीर में विषाक्त पदार्थ पहुंचेंगे। हम स्वस्थ जीवनशैली, स्वस्थ खानपान की बात करते हैं पर उन कंटेनरों का क्या जिनमें हम खाना खाते हैं?”

“मेरी मां को दो बार स्तन कैंसर हुआ,” वह कहती हैं। “औषध विज्ञान की पृष्ठभूमि के चलते, मैं बीमारियों की रोकथाम के मामले में काफी चिंतित रहती हूं और खासकर कैंसर जैसी बीमारी के लिए।  आप किसी की आनुवांशिक बनावट को भले ही नहीं नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन आप जोखिम के कारकों को नियंत्रित कर सकते हैं।”

अनुकूल परिस्थितियों में, सिंघल के टेबलवेयर उत्पाद – जो कृषि से निकलने वाले कचरे से बनते हैं – मात्र 90 दिनों में ही मिट्टी में बदल जाते हैं। और अगर इकोवेयर की बनाई कोई प्लेट भराव क्षेत्र में पहुंच भी जाती है, तब भी यह नष्ट ही हो जाती है और अपने पीछे किसी प्रकार का कचरा नहीं छोड़ती।

Ecoware
इकोवेयर उत्पाद का एक उदाहरण (इकोवेयर)

ये उत्पाद काफी मज़बूत भी होते हैं। ये -20 डिग्री से लेकर 180 डिग्री तक के तापमान को सहन कर सकते हैं, जिसका मतलब है कि ये फ़्रीज़िंग के लिए उपयुक्त हैं और माइक्रोवेव में भी सुरक्षित रहते हैं।

इकोवेयर एक बड़े पैमाने पर बदलाव ला रहा है। वर्तमान में, मुख्य रेस्टोरेंट श्रृंखलाएं और कई पांच सितारा होटलों के अलावा भारत की राष्ट्रीय रेलवे प्रणाली भी सिंघल के ग्राहकों में शामिल हैं। उनके उत्पादों की कीमतें प्लास्टिक उत्पादों की तुलना में केवल 15 प्रतिशत ज्यादा हैं।

“हमारा अनुभव कहता है कि लोगों को थोड़े अधिक पैसे देने में परेशानी नहीं होती है,” सिंघल कहती हैं। “अब यह समस्या नहीं रह गई है क्योंकि वे स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझते हैं और विकल्पों की मांग अधिक बढ़ी है। हालांकि, जागरूकता फैलाना और लोगों को बताना कि पर्यावरण और उनके स्वास्थ्य के लिए क्या सही और क्या गलत है, यह एक चुनौती है। लेकिन बदलाव दिख रहा है।”

#करेंगे संग प्लास्टिक प्रदूषण से जंग विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय है। इस वर्ष का मेज़बान भारत है।

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