India: a land of unity in diversity.

Overview

भारत एकता में विविधता का देश है। 5000 वर्ष पुरानी भारतीय सभ्यता में प्रकृति और इसकी समृद्ध विरासत, प्राचीन परंपराओं, आध्यात्म, संस्कृति और वास्तुकला के बीच अनूठा संबंध रहा है। उत्तर में विशालकाय हिमालय की चोटियां, दक्षिण में धूप से नहाते समुद्र तट, पश्चिम में विशाल रेगिस्तान और पूर्व में अद्भुत नैसर्गिक प्राकॄतिक विरासत, ये सब भारत को भौगोलिक दृष्टि से जीवंत, रंगबिरंगा और अतुल्य बनाते हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस 2018 की मेज़बानी करने वाले देश भारत के लिए, इसकी विरासत और जैव विविधता गर्व और पहचान की बात है। भौगोलिक विविधता और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता ने दीर्घकालिक संस्कृति के साथ संतुलन करते हुए भारत की आर्थिक समृद्धि को बढ़ाया है।

दुनिया की अन्य संस्कृतियों की तरह, भारत की संस्कृति पारंपरिक ज्ञान और मूल्यवान विचारों का भंडार है जो मानव और प्रकृति के बीच के नाजुक संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्त्वपूर्ण है। आर्थिक वृद्धि, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन बहुत ही बारीकी के साथ एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और उनके बीच में सामंजस्य हमारे अस्तित्व के लिए अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है। पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के संयोग से जलवायु प्रदूषण से निपटने के उन्नत उपाय विकसित करने में मदद मिल सकती है, खास कर के प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने में – एक गंभीर पर्यावरण समस्या जो वर्ष दर वर्ष तेज़ी से बढ़ रही है।

भारतीय परंपरा में तीन सूत्रों – घटाना, पुनःचक्रण, पुनःउपयोग, को आत्मसात किया गया है, जो पर्यावरण के अनुकूल सतत जीवन यापन को प्रोत्साहित करते हैं। विश्व पर्यावरण दिवस के मेज़बान के रूप में, भारत अपने पारंपरिक ज्ञान का पुनरुत्थान करेगा और स्वच्छ, हरे-भरे तथा प्लास्टिक मुक्त राष्ट्र के निर्माण में इसे आधुनिक उपायों के साथ प्रयोग करेगा। आयोजन के हिस्से के रूप में, भारत भर में समुद्र तटों, राष्ट्रीय उद्यानों, नदी के किनारों और अन्य स्थानों से प्लास्टिक की सफाई की मुहिम चलाई जा रही है, जिससे सतत जीवनयापन की संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं, “हमारे लिए यह ऐतिहासिक क्षण है। हर काल की अपनी खासियत होती है, और, हर पीढ़ी को इसलिए याद किया जाता है कि उसने किस तरह मिलकर अपनी चुनौतियों का सामना किया। हमारी पीढ़ी को संवहनीयता और जलवायु को स्वस्थ रखने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को पहचानना और इसे सुनिश्चित करना होगा।"

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री, डॉ. हर्ष वर्धन ने कहा है, “हमें प्रत्येक व्यक्ति को पर्यावरण से संबंधित अच्छे हरित कार्य करने और इसे पोषित करने के लिए प्रेरित करना चाहिए। यदि हम इसका अनुकरण करें, तो हर वर्ष अरबों अच्छे हरित कार्य होंगे।

मंत्रीजी ने आगे कहा: “ऋग्वेद का क्षेत्रपति सूक्त हमें यही शिक्षा देता है। 

प्रमुख तथ्य

जनसंख्या – 1.3 अरब की जनसंख्या के साथ भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र और जनसंख्या की दृष्टि से दूसरा सबसे बड़ा देश है। 69 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 31 प्रतिशत लोग उभरते शहरी केंद्रों में रह रहे हैं। हिंदी और अंग्रेजी भारत की आधिकारिक भाषाएं हैं।

क्षेत्रफल – 32 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल के साथ भारत दुनिया का सातवां सबसे बड़ा देश है। इसमें 29 राज्य तथा 7 केंद्र शासित राज्य हैं, जो बर्फीले हिमालय से लेकर दक्षिण में कर्क रेखा तक फैले हैं जो पूर्व में बंगाल की खाड़ी और पश्चिम में अरब सागर के मध्य हिंद महासागर में प्रवेश करती है।

इतिहास – भारतीय उपमहाद्वीप में पनपी सभ्यता दुनिया की प्राचीनतम और सर्वाधिक प्रभावशाली सभ्यताओं में से एक है और इसने कई धर्मों का जन्म, सभ्यताओं और साम्राज्यों का उत्थान और पतन देखा है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर मौर्य साम्राज्य, मुगलों के उदय और ब्रिटिश उपनिवेशी शासन और 1947 में इसकी स्वतंत्रता तक भारत का एक समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक इतिहास रहा है।

सरकार – भारत एक संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणतंत्र है। इसकी संसदीय स्वरूप वाली सरकार की संघीय संरचना की कई ऐकिक खूबियां हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी को वर्ष 2014 में इस पद के लिए चुना गया।

अर्थव्यवस्था – भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और दुनिया की सर्वाधिक प्रगतिशील अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। इसकी जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत है। कृषि, हस्तशिल्प, आधुनिक उद्योग, आईटी और अन्य सेवाएं भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्र हैं। चीन, यूएसए और यूएई इसके सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।

पर्यावरण – भारत के भौगोलिक स्वरूप में बहुत विविधता है। यह दुनिया के स्थलीय क्षेत्रफल का 2.4% है और दुनिया की 7-8% पंजीकृत प्रजातियों का घर है, जिसमें पौधों की 46,000 प्रजातियां और जंतुओं की 91,000 प्रजातियां शामिल हैं। जंगली जंतुओं और पौधों का संरक्षण भारतीय इतिहास का एक अभिन्न हिस्सा रहा है। उत्तर में महान हिमालय पर्वत श्रंखला सबसे ऊंची है और ग्रह के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर जैसे कि कंचनजंघा, नंदा देवी और कामत यहां स्थित हैं। भारत में कई खूबसूरत झीलें और सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र जैसी विशाल नदियां पाई जाती हैं जो दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी प्रणालियों में से एक हैं। 2033 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली केरल की वेम्बनाड झील भारत की सबसे लंबी झील है और चिल्का दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी छिछली झील है। भारत में 16 प्रकार के वन पाए जाते हैं जिनमें सदाबहार उष्ण-कटिबंधीय वन, सूखे पर्वतीय झाड़ीदार वन और उपोष्णकटिबंधीय देवदार वन आदि शामिल हैं ।

वन्य जीवन – भारत की प्रचुर और समृद्ध वनस्पति तथा वन्य जीवन का श्रेय यहां की विविध जलवायु और भौगोलिकता को दिया जाता है। भारत में विशालकाय हाथी, आकर्षक बाघ, शेर, गेंडों और हिम तेंदुओं के अलावा अन्य बहुत से जंतु पाए जाते हैं। यहां पाई जाने वाली पक्षियों की कुछ प्रजातियों में मोर, तोते, किंगफ़िशर, पैराकीट, सारस, मैना, धनेश इत्यादि शामिल हैं। 

संरक्षित क्षेत्र और राष्ट्रीय उद्यान - भारत में मौजूद 4 ग्लोबल बायोडाइवर्सिटी हॉटस्पॉट्स, 103 राष्ट्रीय उद्यान, 543 अभयारण्य और 50 टाइगर रिज़र्व यहां की समृद्ध तथा रोचक जैव विविधता को प्रदर्शित करते हैं। इनकी स्थापना भारत सरकार ने इस महत्त्वपूर्ण संसाधन के संरक्षण के लिए की है।