Friday, April 20, 2018 दुनिया की सबसे गहरी महासागरीय खाई में पहुंचा एक बार उपयोग में आने वाला प्लास्टिक

एक नए अध्ययन से पता चला है कि मानवीय गतिविधियों से महासागरों के सबसे गहरे हिस्से भी प्रभावित हो रहे हैं, जो मुख्य भूमि से 1,000 किलोमीटर से भी दूर हैं

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एक नए अध्ययन से यह पता चला है कि मानवीय गतिविधियों से महासागरों के सबसे गहरे हिस्से भी प्रभावित हो रहे हैं, जो मुख्य भूमि से 1,000 किलोमीटर से भी दूर हैं।

महासागरीय पारिस्थितिक तंत्रों के लिए प्लास्टिक प्रदूषण सबसे गंभीर खतरे के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। दुनिया भर के नेताओं, वैज्ञानिकों और समुदायों ने माना है कि इस दिशा में जल्द से जल्द कदम उठाने की ज़रूरत है, हालांकि प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभावों को सही से समझा नहीं गया है।

प्लास्टिक प्रदूषण के दूरगामी परिणामों के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के विश्व संरक्षण निगरानी केंद्र के वैज्ञानिकों सहित महासागर विज्ञानियों ने गहन-समुद्री कचरा डेटाबेस (डेब्रिस डेटाबेस) के आंकड़ों का विश्लेषण किया। जापान एजेंसी फ़ॉर मरीन-अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के ग्लोबल ओशियनोग्राफ़िक डेटा सेंटर ने यह डेटाबेस सार्वजनिक उपयोग के लिए वर्ष 2017 में लॉन्च किया था। इसमें 30 साल के समुद्री कचरे की तस्वारें और वीडियों हैं जिन्हें गहरे समुद्र में जाने वाले वाहनों और रिमोट से संचालित किए गए वाहनों के ज़रिए एकत्रित किया गया है।

आंकड़ों से पता चला है कि 5,010 डुबकियों में प्लास्टिक, धातु, रबड़, मछली पकड़ने के सामान सहित, मानवनिर्मित कचरे की 3000 से भी अधिक वस्तुएं पाई गईं। कुल कचरे का एक तिहाई से अधिक हिस्सा मैक्रो-प्लास्टिक था, जिसमें से 89 प्रतिशत एक बार उपयोग किये जाने वाले उत्पाद थे। 6000 मीटर से गहरे क्षेत्रों में, आधे से ज्यादा कचरा प्लास्टिक था, जिसमें से अधिकांश एक बार उपयोग होने वाला था।

अध्ययन – समुद्र की गहराइयों में मानव के कदम: गहरे समुद्र के प्लास्टिक कचरे का 30 वर्षों का रिकॉर्ड – यह भी खुलासा करता है कि एक बार उपयोग में आने वाला प्लास्टिक दुनिया की सबसे गहरी महासागरीय खाई तक पहुंच चुका है – सतह से 10,898 मीटर नीचे मारियाना ट्रेंच में एक प्लास्टिक का बैग पाया गया। एक बार उपयोग में आने वाले प्लास्टिक का सर्वव्यापी वितरण, जो कि समुद्र के सबसे गहरे हिस्सों में भी जा पहुंचा है, यह दर्शाता है कि दैनिक मानवीय गतिविधियों और पर्यावरण के दूरस्थ क्षेत्रों में भी स्पष्ट संबंध है।

एक बार गहरे समुद्र में पहुंच जाने के बाद, प्लास्टिक हज़ारों वर्षों तक बना रह सकता है। गहरे समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र एक निश्चित क्षेत्र तक सीमित होते हैं और इनकी वृद्धि दर भी काफी धीमी होती है, इसलिए प्लास्टिक प्रदूषण के संभावित खतरे काफी चिंताजनक हैं। यह चिंता लगातार बढ़ती जा रही है कि गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, खनन और निर्माण-कार्य करने जैसी गतिविधियों के चलते – जैविक और अजैविक दोनों संसाधनों के प्रत्यक्ष दोहन (शोषण) से समुद्री जीवन पर पहले से ही प्रभाव पड़ रहा है। इस अध्ययन के परिणाम यह भी दर्शाते हैं कि गहरे समुद्र के पारिस्थितिक तंत्र अप्रत्यक्ष रूप से मानवीय गतिविधियों से भी प्रभावित हो रहे हैं।

प्लास्टिक कचरे का उत्पादन कम करना, गहरे समुद्र के प्लास्टिक प्रदूषण की समस्या को हल करने का एकमात्र उपाय नज़र आता है। गहरे समुद्र के प्लास्टिक प्रदूषण के सीमित आंकड़ों को साझा करने के लिए एक वैश्विक निगरानी नेटवर्क की आवश्यकता है और अत्यधिक प्लास्टिक कचरे वाले, जैविक और पर्यावरणीय नज़रिए से महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में असर का मूल्यांकन करने के लिए सर्वेक्षण को प्राथमिकता देनी चाहिये, साथ ही महासागरों के चक्रों के तरीकों का इस्तेमाल कर पता लगाना चाहिए कि प्लास्टिक किस तरह भूमि से गहरे समुद्र में पहुंच रहा है। साथ ही,।

# करेंगे संग प्लास्टिक प्रदूषण से जंग विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय है। 

समुद्रों और महासागरों पर हमारे काम के बारे में और अधिक जानें

This article was originally published by UNEP-WCMC.

यह लेख मूल रूप से UNEP-WCMC द्वारा प्रकाशित किया गया था।

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