Monday, March 19, 2018 पुनरुद्धार के तरीकों की खोज: केन्या की अथी नदी की यात्रा

इस विश्व जल दिवस पर संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण प्रकृति पर आधारित उपायों को प्रोत्साहित कर रहा है

लेख

अथी नदी की उत्पत्ति नैरोबी में सीना ताने खड़े नगोंग पहाड़ों से होती है। यह चहलकदमी से भरे महानगरों से होती हुई, केन्या के सबसे बड़े राष्ट्रीय उद्यान सावो ईस्ट से होकर गुज़रती है और आखिरकार हिंद महासागर में जाकर गिरती है। यह नदी, इसकी सहायक नदियां और इसके नदीतट लाखों लोगों और जंगली जंतुओं के लिए सिंचाई और पीने के पानी का स्रोत हैं। इसका पानी और किनारे इस क्षेत्र के कई उद्योगों का आधार है जिसमें खनन और पर्यटन भी शामिल हैं।

हालांकि, एक्सप्लोरर्स क्लब ऑफ़ केन्या नाम का एक स्थानीय पर्यावरण समूह इस महत्त्वपूर्ण नदी प्रणाली को लेकर चिंतित है। इस बात के स्पष्ट संकेत दिख रहे हैं कि मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण की वजह से नदी की प्राकृतिक क्षमता पर दबाव पड़ रहा है और यह पीने के लिए, कृषि तथा वन्य- जीवन के लिए समुचित मात्रा में जल नहीं उपलब्ध करा पा रही है। कुछ जगहों पर किसानों ने अपने खेत छोड़ दिए हैं और पक्षियों तथा जंगली जीवों की कुछ प्रजातियां देखने को नहीं मिल रही हैं।

समूह ने नदी के रास्ते पर एक पैदल अभियान आयोजित किया। इस अभियान का उद्देश्य नदी के पानी की स्थिति के बारे में जानना तथा इसके प्रदूषण के संभावित स्रोतों का पता लगाकर नदी के पतन को रोकने के उपायों की खोज करना था।

Athi River solid waste
कुछ जगहों पर केन्या की अथी नदी के किनारों पर ठोस कचरे के ढेर लगे हुए हैं। (एक्सप्लोरर्स क्लब ऑफ़ केन्या)

“क्लब के संस्थापक, अल्बर्टो बोर्जिस कहते हैं, “हमें जो देखने को मिला, वह परेशान कर देने वाला था। अथी नदी गंदी और बदबूदार थी और इसका पानी गाढ़े हरे रंग का था और इसके किनारों पर कचरा ही कचरा फैला हुआ था। आज से 15 साल पहले ऐसा नज़ारा बिल्कुल नहीं था।”

यात्रा के पहले हिस्से के दौरान, नदी की उत्पत्ती से लेकर पहले एक तिहाई रास्ते में क्लब के सदस्यों ने देखा कि नदी में बिना ट्रीट किए सीवर, रसायन और गंदा पानी बहकर आ रहे थे और साथ ही साथ प्लास्टिक बैग, बोतलों, टायर, कांच और धातु के टुकड़ों जैसा ठोस कचरा भी गिर रहा था।

नदी के किनारे पेड़ पौधों को जीवित रख कर स्थानीय प्रशासन जल की इकाइयों को संरक्षित कर सकता है। ये पेड़ पौधे पानी के फ़िल्टर का काम करते हैं, नदीतट को स्थिर बनाते हैं और छांव प्रदान कर पानी का तापमान नियंत्रित करते हैं।

नैरोबी नदी,अथी नदी की एक सहायक नदी है जो कई घनी जनसंख्या वाले क्षेत्रों से होकर गुज़रती है। यह अथी नदी के पारिस्थितिक तंत्र में प्रदूषण का सबसे बड़ा योगदान देने वाले कारणों में से एक है। नैरोबी उपनगर कामुलू के पास उन्हें बड़े पैमाने पर बालू का खनन देखने को मिला, जिसने नदी की तलहटी के पारिस्थितिक तंत्र को नुकसान पहुंचाया और नष्ट किया है। यह स्पष्ट है कि अथी नदी अपना प्राकृतिक संतुलन खो रही है।

प्रकृति को बचाने वाले उपायों की खोज

22 मार्च के विश्व जल दिवस का विषय है “प्रकृति के पास हल है”। विषय का आशय यह दर्शाना है कि जल प्रदूषण और बाढ़ तथा सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं को घटाने के लिए हम पहले से प्रकृति में मौजूद उपायों का इस्तेमाल किस तरह कर सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के जल गुणवत्ता विशेषज्ञ किलियन क्राइस्ट कहते हैं, “ऐसे कई तरीके हैं जिनसे हम नदी की दोबारा ठीक होने की उसकी प्राकृतिक क्षमता की मदद कर सकते हैं”।

“नदी में दूषित जल का प्रवाह रोकना और एक प्राकृतिक तलहटी का संरक्षण करना जो वायु के संचार में मदद करता है, इस तरह से हम नदी को खुद को साफ करने में मदद कर सकते हैं। नदी के किनारे पेड़ पौधों को जीवित रख कर स्थानीय प्रशासन जल की इकाइयों को संरक्षित कर सकता है। ये पेड़ पौधे पानी के फ़िल्टर का काम करते हैं, नदीतट को स्थिर बनाते हैं और छांव प्रदान कर पानी का तापमान नियंत्रित करते हैं।”

इसी तर्ज पर, एक्सप्लोरर्स क्लब ऑफ़ केन्या ने अथी नदी को संरक्षित करने तथा इसे स्वस्थ बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

·    बिना ट्रीट किए गए रासायनिक या औद्योगिक कचरे अथवा सीवेज को नदी में पहुंचने से रोकना।

·    अधिक जैव घटक (बायोडिग्रेडेबल) उत्पादों का इस्तेमाल कर रासायनिक/औद्योगिक कचरे को स्रोत पर ही ट्रीट करना।

·    नैरोबी के रौ में सीवेज ट्रीटमेंट तालाबों का विस्तार और अपग्रेडेशन, क्योंकि वे अब सीवेज की मात्रा को प्रभावशाली तरीके से ट्रीट नहीं कर सकते ।

·   नैरोबी के आसपास के सभी रिहायशी क्षेत्रों में समुचित सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट इकाइयां स्थापित करना; कचरे को छांटना तथा पुनःचक्रित करना ताकि यह नदी में नहीं पहुंचे; और

·    अथी नदी पर हो रही खनन गतिविधियों को नियमित करना।

केन्या ने अगस्त 2017 में एक बड़ा सांकेतिक कदम उठाते हुए,अन्य कई देशों की सूची में जुड़ गया जिन्होंने प्लास्टिक बैग को प्रतिबंधित कर दिया है या इस पर कर लगा दिया है जो देश की झीलों और नदियों में पहुँच चुके थे। सुपरमार्केट अब प्लास्टिक बैग नहीं देते, हालांकि कुछ फल और सब्जी विक्रेताओं द्वारा अब भी उनका गैरकानूनी ढंग से इस्तेमाल किया जाता है।

Sand harvesting Athi
अथी नदी में बालू का खनन (एक्सप्लोरर्स क्लब ऑफ़ केन्या)

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण का अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण प्रौद्योगिकी केंद्र (आईईटीसी) भी अथी नदी में पर्यावरण के अनुकूल सुधार लाने की दिशा में काम कर रहा है। अथी रिवर एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग ज़ोन उन तीन शुरुआती स्थानों में से एक है जिसकी पहचान आईईटीसी द्वारा विकसित किए गए एक बड़े प्रोजेक्ट के हिस्से के रूप में की गई है। इस प्रोजेक्ट की फ़ंडिंग ग्रीन क्लाइमेट फ़ंड द्वारा की जा रही है। प्रोजेक्ट का उद्देश्य अथी नदी के रास्ते पर पड़ने वाले औद्योगिक पार्कों के साथ-साथ केन्या के मौजूदा और आगामी औद्योगिक पार्कों को “हरा-भरा” बनाना है– जिसके लिए पर्यावरण के अनुकूल व्यवहारों को प्रोत्साहित किया जाएगा और साथ ही साथ, कचरे  को घटाने और इसके बेहतर प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। ग्रीन माइक्रोबिज़नेस के सृजन को बढ़ावा देने के लिए प्रोजेक्ट स्थानीय समुदायों के साथ मिलकर भी काम करेगा।

“ताज़े जल के पारिस्थितिक तंत्रों को सहारा देने के लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण द्वारा किया गया कोई भी काम, जिसमें प्रकृति में पहले से मौजूद प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है, उसे प्रकृति आधारित उपाय कहा जा सकता है,” यह कहना है संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण  के ताज़ा जल विशेषज्ञ योन्जू जियोंग का। “इसके उदाहरण हैं वनीकरण, घास के मैदानों की बहाली, पौधों वाले दलदली क्षेत्रों का संरक्षण, कृषि संरक्षण, आर्द्र भूमि का निर्माण (जैसे कि मलिन जल को ट्रीट करने के लिए कृत्रिम आर्द्र भूमि) और आर्द्र भूमि की बहाली।”

यूनेस्को और कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी के साथ मिलकर, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण वर्ष 2018 के विश्व जल दिवस मुहिम का नेतृत्व कर रहा है। संगठन 2018 की संयुक्त राष्ट्र विश्व जल विकास रिपोर्ट के एक संबंधित विषय, जल के लिए प्रकृति आधारित उपाय, के लिए एक लेखक का योगदान भी कर रहा है।

रिपोर्ट को 19 मार्च को विश्व जल फ़ोरम (वर्ल्ड वाटर फोरम), ब्राज़ीलिया, ब्राज़ील में लॉन्च किया जाएगा।

#प्लास्टिकप्रदूषणकोहराएं विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय है।

अधिक जानकारी के लिए, संपर्क करें: Yeonju.Jeong@un.org

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