Thursday, February 22, 2018 प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने की 5-वर्षीय यात्रा

जीवाश्म ईंधन की एक भी बूँद का इस्तेमाल किए बिना दुनिया के सारे महासागरों को पार करना संभव है: “रेस फ़ॉर वॉटर” इसका प्रमाण है।

लेख

जीवाश्म ईंधन की एक भी बूँद का इस्तेमाल किए बिना दुनिया के सारे महासागरों को पार करना संभव है: रेस फ़ॉर वॉटर इसका प्रमाण है। महासागरों में फैल रहे प्लास्टिक प्रदूषण पर काबू पाने की तत्काल आवश्यकता के बारे में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से पिछले वर्ष एक नाव पूरी दुनिया का चक्कर काटने की पाँच वर्षीय यात्रा पर रवाना की गई। ख़ास बात यह है कि यह नाव पूरी तरह सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन और पवन ऊर्जा से चलती है।

इस सप्ताह, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन में अपने पड़ावों की शृंखला में यह नाव पनामा शहर पहुँची। इस शृंखला के अन्य पड़ावों में बरमूडा, क्यूबा, डोमिनिकन गणराज्य और ग्वाडेलोप शामिल हैं। 

Race for Water
रेस फ़ॉर वॉटर को चलाने वाली नवीकरणीय ऊर्जा के स्रोतों में से एक स्रोत, नाव के सौर पैनलों का एक दृश्य। (स्रोत : रेस फ़ॉर वॉटर)

स्विट्ज़रलैंड का रेस फ़ॉर वॉटर फ़ाउंडेशन इस अभियान का नेतृत्व कर रहा है और इसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएन एन्वायरन्मेंट) का समर्थन प्राप्त है। यह अभियान अपने मार्ग में विभिन्न समुदायों तक पहुँचेगा। प्लास्टिक प्रदूषण से कैसे निपटें इस बारे में नाव पर दिए गए व्याख्यानों और परस्पर संवाद वाली प्रस्तुतियों के द्वारा अब तक 1,500 से भी अधिक बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं। हर वर्ष 80 लाख टन से भी अधिक प्लास्टिक महासागरों को अपना आख़िरी पड़ाव बनाता है और उन्हें प्रदूषित करता है। अगर जल्द कोई कदम नहीं उठाया गया, तो 2050 तक हमारे महासागरों में प्लास्टिक की मात्रा, मछलियों से अधिक हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहाइम ने कहा, “रेस फ़ॉर वॉटर फ़ाउंडेशन यह दिखा रही है कि शून्य-उत्सर्जन वाला भविष्य कोई स्वप्नलोक नहीं है – वह वास्तविकता का रूप लेना शुरू कर चुका है। यूएन पर्यारवण कार्यक्रम को इस नवरचनाकारी नाव की विश्व-यात्रा का समर्थन करने पर गर्व है।”

Camille Rollin
रेस फ़ॉर वॉटर विशेषज्ञ कमील रोलिन नाव पर बच्चों कोप्लास्टिक कचरे से ऊर्जापरियोजनाओं के बारे में बताते हुए (स्रोत: रेस फ़ॉर वॉटर)

रेस फ़ॉर वॉटर का चालक दल भी ऐसी शोध परियोजनाओं का बीड़ा उठाता है जो वन्यजीवों और जैविक चक्रों पर समुद्री कचरे के असर को मापने का लक्ष्य रखती हैं। इस अभियान का लक्ष्य सरकारों, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों को प्लास्टिक का उपभोग घटाने और प्लास्टिक कचरे का बेहतर प्रबंधन करने के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित करना है।

अभियान के नेतृत्वकर्ता फ़्रैंक डेविड ने कहा, “हमें पनामा में आकर यहां के लोगों को समुद्री पारिस्तिथिक तंत्र (इकोसिस्टम) की नाज़ुकता और माइक्रोप्लास्टिक समेत प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए ज़रूरी समाधानों के बारे में बताने का मौका मिला है और हम बेहद उत्साहित हैं।”

रेस फ़ॉर वॉटर  एक 35-मीटर लंबी नाव है जिसकी छत पर 500 वर्गमीटर में फैले सौर पैनल लगे हैं, समुद्री पानी की हाइड्रोजन से बिजली बनाने का एक संयंत्र है और अधिकतम दक्षता वाली पाल है जो हवा की शक्ति का लाभ उठाने में मदद करती है। 

plastic waste
चालक-दल द्वारा अध्ययन के लिए एकत्र किया गया प्लास्टिक कचरा। (स्रोत : संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम)

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के क्षेत्रीय निदेशक लिओ हेलमैन ने रेस फ़ॉर वॉटर  के अपने दौरे पर कहा, “प्लास्टिक प्रदूषण हमारे समय की सबसे गंभीर समस्या है और नई किस्म की यह नाव दर्शाती है कि तकनीक और नवरचना के ज़रिए हम प्लास्टिक प्रदूषण का कुशल समाधान पा सकते हैं"।

हेलमैन ने आगे कहा,“हमारे पास वे नवरचनाएं पहले से हैं जिनसे हमें एक नई प्लास्टिक अर्थव्यवस्था स्थापित करने में मदद मिलेगी। हमें अब हमारे उत्पादन व उपभोग के गैर-टिकाऊ तरीकों को बदलने के लिए सभी सेक्टरों में गति बढ़ाने की ज़रूरत है और यही कारण है कि प्लास्टिक प्रदूषण इस वर्ष के विश्व पर्यावरण दिवस का विषय है।”

Race for Water
जब हवा नहीं होती तब भीरेस फ़ॉर वॉटर को जीवाश्म ईंधन की ज़रूरत नहीं होती है। (स्रोत : रेस फ़ॉर वॉटर)

“प्लास्टिक प्रदूषण को हराएं”, जो कि विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय है, सरकारों, उद्योगों और समुदायों से आग्रह करता है कि वे एक बार उपयोग में आने वाले  प्लास्टिक से नाता तोड़ें, क्योंकि वह हमारे महासागरों को प्रदूषित कर रहा  है, समुद्री जीवन को नुकसान पहुँचा रहा  है और मानव स्वास्थ्य को ख़तरे में डाल रहा  है।

रेस फ़ॉर वॉटर अभियान इस बेहद ज़रूरी मुद्दे पर जागरुकता फैलाएगा। आने वाले महीनों में यह नाव पेरू और चिली में रुकेगी, जिसके बाद वह प्रशांत द्वीपों की ओर निकल जाएगी। डेविड ने कहा, “इसके बाद यह शंघाई, टोक्यो और दुबई में रुकेगी और फिर भूमध्यसागर में इस अनूठे अभियान को ख़त्म करके 2021 में हम फ़्रांस लौट आएंगे।”

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संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के क्षेत्रीय निदेशक लिओ हेलमैन, अभियान के नेतृत्वकर्ता फ़्रैंक डेविड के साथ रेस फ़ॉर वॉटर पर। (स्रोत : संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम)

पनामा, चिली और पेरू संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के स्वच्छ सागर अभियान का हिस्सा हैं, जो सरकारों, आम जनता, नागरिक समाज और प्राइवेट सेक्टर को समुद्री प्लास्टिक कचरे के विरुद्ध लड़ी जा रही वैश्विक लड़ाई में शामिल करने का लक्ष्य रखता है।

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