Wednesday, May 9, 2018 प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के लिए पैदल यात्रा पर भारतीय महिला

पश्चिम भारत के वडोदरा की एक 32 वर्षीय महिला राजेश्वरी सिंह, दिल्ली के रास्ते पर हैं। लेकिन इस तेज़-तर्रार महिला ने राजधानी पहुंचने के लिए किसी आसान रास्ते को नहीं चुना है।

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पश्चिम भारत के वडोदरा की एक 32 वर्षीय महिला राजेश्वरी सिंह, दिल्ली के रास्ते पर हैं। लेकिन इस तेज़-तर्रार महिला ने राजधानी पहुंचने के लिए किसी आसान रास्ते को नहीं चुना है। उत्तर भारत में तेज़ी से बढ़ते तापमान, और तेज़ गर्मी के बावजूद, सिंह पैदल चल कर दिल्ली जाएंगी और इस यात्रा के दौरान वह 22 प्रमुख शहरों से होकर गुज़रते हुए 1,100 किलोमीटर से भी अधिक दूरी की पैदल यात्रा तय करेंगी।

आपको बता दें कि यह बगीचे की मनोरम चहलकदमी जैसा नहीं है। सिंह की पैदल यात्रा 22 अप्रैल को शुरू हुई और इसे पूरा होने में 6 सप्ताह लगेंगे। इसका उद्देश्य प्लास्टिक द्वारा फैलाए जाने वाले प्रदूषण के प्रति जागरूकता फैलाना है।

सिंह की जागरूकता पैदल यात्रा के लिए उन्हें उनके गृहराज्य गुजरात के विधानसभा अध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी ने सराहना की है। उनकी यात्रा 5 जून के विश्व पर्यावरण दिवस का रन-अप है, जिसकी मेज़बानी इस वर्ष भारत कर रहा है।

सिंह ने अपनी पैदल यात्रा के विषय के रूप में “मेरा कचरा, मेरी जिम्मेदारी” को चुना है। उनका लक्ष्य बेहद सीधा है: रास्ते में उनसे मिलने वाले लोगों में प्लास्टिक का उपयोग रोकने के लिए जागरूकता फैलाना और इस अवसर से अपने संगठन के लिए राशि इकट्ठी करना।

“मैं पूर्णतः 0% प्रदूषण के साथ अपना सफर पूरा कर रही हूं, और मैं किसी भी प्रकार के प्लास्टिक में पैक खाना, ड्रिंक्स और यहां तक कि पानी से भी परहेज कर रही हूं। क्योंकि मैं कई वर्षों से किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं कर रहीं हूं, मैं अपनी यात्रा पर लोगों से मिलूंगी और उनसे बातचीत करूंगी। अपनी जागरूकता पैदल यात्रा के दौरान मैं 22 प्रमुख शहरों तथा चार राज्यों गुजरात, राजस्थान, हरयाणा और एनसीआर [राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र] से गुज़रते हुए 5 जून को दिल्ली पहुंचूंगी, जो कि विश्व पर्यावरण दिवस है,” सिंह ने कहा। गुजरात पर्यटन विभाग और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम सिंह के प्रयास को समर्थन दे रहे हैं।

सिंह, जिन्होंने पिछले 10 वर्षों में किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया है, अपनी यात्रा के दौरान मिलने वाले लोगों को भी इसी व्यवहार के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। सिंह प्रतिदिन 30 किलोमीटर तक की दूरी तय करेंगी, और उत्तर भारत में लगातार बढ़ते तापमान से बचने के लिए वह सुबह-सुबह या देर शाम को पैदल चलेंगी।

सिंह का उद्देश्य अपनी पैदल यात्रा के द्वारा शिक्षा, शोध तथा कचरा प्रबंधन के क्षेत्रों में सहायता के लिए राशि जुटाना है। एक ऐसी ही पहल उनका “कैरावैन क्लासरूम” है, जो उनके गृहनगर वडोदरा में कचरा उठाने वाले समुदायों की सहायता करता है।

अपनी पैदल यात्रा के दौरान अब तक सिंह ने कई रोमांचकारी अनुभव किए हैं, जैसे कि एक दिन एक कुत्ता उनका जूता लेकर भाग गया। सिंह बताती हैं, “मैंने कुत्ते का पीछा करने की कोशिश की, लेकिन अपने मुंह में मेरा जूता लेकर वह दौड़ता रहा। आखिर में मैंने इसे कुछ मीटर आगे पाया। अभी यह मज़ेदार लग रहा है लेकिन उस समय मैं परेशान हो गई थी कि मैं अपने जूते के बिना कैसे चल पाऊंगी।”

वह आगे कहती हैं, कुछ तकलीफ देने वाली घटनाएं भी हुई हैं। “कई बार बाइक सवार आदमियों ने मेरा पीछा किया, लेकिन मैंने इनसे भी निपटा” वह नज़रंदाज करते हुए कहती हैं।

अपनी यात्रा के दौरान मिल रही चुनौतियों के बावजूद, सिंह अपने लक्ष्य की प्राप्ति को लेकर प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया है और प्लास्टिक की बोतल से पानी भी नहीं पिया है। वह सरकारी विश्रामगृहों में ठहरती हैं और वहां पर मिलने वाले लोगों को प्लास्टिक प्रदूषण तथा प्लास्टिक के विकल्पों के बारे में बताती हैं। वह स्कूलों तथा अन्य सामुदायिक संस्थानों में भी जाती हैं।

क्योंकि वह स्थानीय पानी पीती हैं तथा प्लास्टिक की बोतलें खरीदने से इनकार कर चुकी हैं, सिंह ने पाया है कि किस तरह से पानी हर शहर, कस्बे और गांव में अलग-अलग स्वाद का होता है। “अगर मैंने रास्ते में पैक पानी खरीदा होता तो मैं इन बारीक अंतरों के बारे में कभी जान नहीं पाती,” वह कहती हैं।

कभी-कभी  लोग उनकी यात्रा में कुछ समय के लिए शामिल हो जाते हैं, बाकी समय वह अकसर अकेली रहती हैं। उनके पैरों में छाले पड़ चुके हैं, लेकिन पैदल यात्रा के मिशन पर निकली इस लड़की के उत्साह में ज़रा भी कमी नहीं आई है।

#करेंगे संग प्लास्टिक प्रदूषण से जंग विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय है।

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