Saturday, June 2, 2018 लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई द्वीप समूह ने प्लास्टिक बैग को अलविदा कहा

30 मई को, चिली एक बार उपयोग में आने वाले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध को मंज़ूरी देने वाला पहला दक्षिण अमेरिकी देश बन गया। आगामी 5 जून को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस से पहले प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के अपने प्रयासों के लिए इसे दुनिया भर से बधाईयां मिल रही हैं।

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30 मई को, चिली एक बार उपयोग में आने वाले प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध को मंज़ूरी देने वाला पहला दक्षिण अमेरिकी देश बन गया। आगामी 5 जून को मनाए जाने वाले विश्व पर्यावरण दिवस से पहले प्लास्टिक प्रदूषण से निपटने के अपने प्रयासों के लिए इसे दुनिया भर से बधाईयां मिल रही हैं।

2017 में, मिशेल बैचेलेट के राष्ट्रपति पद के दौरान, देश ने 100 तटीय समुदायों में प्लास्टिक बैग के उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया। लेकिन मौजूदा राष्ट्रपति सेबस्टियन पिनेरा की सरकार ने एक कदम आगे बढ़ते हुए कांग्रेस के सम्मुख इस प्रतिबंध को राष्ट्रव्यापी बनाने का प्रस्ताव रखा।

प्रमुख खुदरा विक्रेताओं के लिए प्रतिबंध एक वर्ष और छोटे व्यवसायों के लिए दो वर्ष की अवधि में लागू होगा।

"आज हम अपने बच्चों, उनके बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर ग्रह की विरासत छोड़ने के लिए तैयार हैं," पिनेरा ने कहा।

लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई द्वीप समूह के कई अन्य देश टैक्स, प्रतिबंधों और तकनीकी नएपन के ज़रिए प्लास्टिक बैग के उत्पादन और खपत को सीमित कर रहे हैं और महासागरों और समुद्री प्रजातियों पर उनके हानिकारक प्रभाव को कम कर रहे हैं।

अनुमान के मुताबिक दुनिया में हर साल 5 खरब तक प्लास्टिक बैग की खपत होती है, जिसमें से अधिकांश पॉलीएथिलीन से बने होते हैं। यह पेट्रोलियम से प्राप्त कम लागत वाला एक पॉलीमर है, जिसे नष्ट होने में कम से कम 500 साल लग जाते हैं। कुल प्लास्टिक कचरे में से मात्र 9 प्रतिशत का ही पुनःचक्रण किया जाता है।

Plastic bag and bird
प्लास्टिक प्रदूषण पक्षियों और अन्य जंगली जीवों के लिए हानिकारक है। (शटरस्टॉक)

लैटिन अमेरिका और कैरीबियाई द्वीप समूह – जो अमेज़न नदी घाटी, पेटागोनियाई पहाड़ों और प्रवाल भित्तियों की सघनता के कारण जाने जाते हैं – जैव विविधता के मामले में बेहद संपन्न हैं।

इस क्षेत्र की सभी सरकारें प्रदूषण को समाप्त करने के लिए साहसी नीतियां लागू करती आई हैं। एंटीगुआ और बरबूडा 2016 में इस क्षेत्र के पहले देश बने जिसने प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगा दिया। जल्द ही कोलंबिया ने भी एक ऐसे ही प्रतिबंध को मंज़ूरी दे दी, और 2017 में बड़े प्लास्टिक बैग पर टैक्स लगा दिया, और साथ ही साथ अधिक टिकाऊपन और पुनः उपयोगिता को हासिल करने के उद्देश्य से उनके डिज़ाइन में बदलाव लाने का आदेश दिया।

इस प्रतिबंध के परिणाम स्वरूप प्लास्टिक बैग की खपत में 35 प्रतिशत की कमी आई है और कुल 10 करोड़ 460 लाख कोलंबियन पेसो (लगभग 30 करोड़ 6 लाख अमेरिकी डॉलर) अर्जित हुए हैं, यह कहना है आन्द्रे वेलास्को का, जो कोलंबिया वित्त और सार्वजनिक क्रेडिट उपमंत्री हैं।

टैक्स की शुरुआत वर्ष 2017 में 20 कोलंबियन पेसो प्रति प्लास्टिक बैग के साथ हुई थी और 2020 में 50 पेसो (लगभग 0.02 डॉलर) पहुंचने तक इसमें प्रतिवर्ष 10 पेसो की वृद्धि होगी।

कोलंबिया का पड़ोसी, पनामा, वर्ष 2018 की शुरुआत में मध्य अमेरिका का पहला देश बन गया जिसने पॉलीएथिलीन से बने बैग पर प्रतिबंध लगाया। समुद्री कचरे से निपटने के लिए भी देश में एक राष्ट्रीय योजना तैयार की जा रही है।

पनामा के एक नीति निर्माता, समीर गोज़ाइन, इस कानून के एक समर्थक हैं। वे कहते हैं कि जनसंख्या की मानसिकता बदल रही है और अधिक से अधिक लोग कार्डबोर्ड या धागे से बने बैग जैसे दोबारा उपयोग में आने वाले या बायोडिग्रेडेबल बैग चुन रहे हैं।

"दुनिया भर में बढ़ती संख्या में देशों ने समान कानून पारित किए हैं, इसलिए हां, हम कह सकते हैं कि प्लास्टिक बैग के खिलाफ़ जंग में हम आगे बढ़ रहे हैं," गोज़ाइन कहते हैं।

कोस्टा रिका ने 2021 तक डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक के उपयोग को सख्ती से कम करने के लिए एक राष्ट्रीय रणनीति अपनाई, जबकि कैरीबियाई द्वीप समूह में, बेलीज़, बहामास और बरमूडा ने एक बार उपयोग में आने वाले प्लास्टिक को खत्म करने के लिए कानून या तो पारित कर दिए हैं या उनका निर्माण कर रहे हैं।

इक्वाडोर का उद्देश्य अपने दूरस्थ द्वीप समूह गैलापागोस को प्लास्टिक-मुक्त द्वीपसमूह में बदलना है: इस साल 21 अगस्त के बाद प्लास्टिक के स्ट्रॉ, बैग या बोतलों को बेचा या इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।

पेरू में, प्लास्टिक बैग के मुद्दे पर कुछ विधेयकों पर कांग्रेस में बहस जारी है। सरकार द्वारा तैयार किए गए नवीनतम विधेयक का उद्देश्य अपने लागू होने के पहले वर्ष के अंदर इस उत्पाद की खपत को 35 प्रतिशत तक कम करना है।

शहरों में

क्षेत्र के तीन सबसे बड़े शहर - मेक्सिको सिटी, साओ पाउलो और ब्यूनस एरीस - भी प्लास्टिक बैग के खिलाफ जंग में शामिल हो गए हैं। मेक्सिको की राजधानी, ऐसा करने वाले आरंभिक शहरों में से एक थी। अगस्त 2009 में, राजधानी की सरकार ने ठोस कचरा कानून में सुधार किया और दुकानों को निःशुल्क बैग देने से प्रतिबंधित कर दिया।

ब्यूनस एरीस एक कदम और आगे चला गया: 1 जनवरी 2017 से शहर के सभी सुपरमार्केट को डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक शॉपिंग बैग का उपयोग करने या बेचने से प्रतिबंधित कर दिया गया।

Buenos Aires
ब्यूनस एरीस में सुपरमार्केट को डिस्पोज़ेबल शॉपिंग बैग बांटने की मनाही है। (पिक्साबे)

कानून के लागू होने से पहले शहर में प्रति वर्ष 5 करोड़ प्लास्टिक बैग का उपयोग होता था, यह कहना है एडुआर्डो मैकियावेली का, जो अर्जेंटीना की राजधानी में पर्यावरण और सार्वजनिक स्थान मंत्री हैं।

मैकियावेली ने कहा कि, इनमें से बहुत सारे बैग शहर के जलमार्गों में पहुंचकर बाढ़ का कारण बनते थे, परंतु इस कानून के लागू होने के बाद इस स्थिति में "भारी" बदलाव देखने को मिला। रोज़ारियो, पिनामार और बरिलोचे सहित अर्जेंटीना के अन्य शहरों में भी एक ऐसा ही प्रतिबंध लागू किया गया है।

मैकियावेली कहते हैं, "यह ज़रूरी है कि बड़े शहर एक सक्रिय भूमिका निभाएं, क्योंकि सबसे सघन आबादी के चलते वे पर्यावरण को अधिक प्रभावित करते हैं।"

साओ पाउलो में, सरकार ने वर्ष 2011 में दुकानों में प्लास्टिक बैग के निःशुल्क वितरण पर प्रतिबंध लगाने वाले एक कानून को मंज़ूरी दे दी। हालांकि कुछ कानूनी दावों के चलते कुछ वर्षों के लिए यह कानून निष्प्रभावी रहा, लेकिन 2015 में ब्राज़ील की न्यायपालिका द्वारा इसके क्रियान्वयन को समर्थन मिलने के बाद यह पुनः प्रभावी हो गया।

साओ पाउलो की नगर परिषद के आंकड़ों के मुताबिक, कानून लागू होने के प्रथम वर्ष के दौरान डिस्पोज़ेबल बैग की खपत 70 प्रतिशत तक कम हो गई।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के स्वच्छ समुद्र अभियान का उद्देश्य, दुनिया भर के महासागरों को प्रदूषित करने वाले डिस्पोजे़ल प्लास्टिक की खपत को सख्ती से कम करना और माइक्रोप्लास्टिक के उपयोग को खत्म करना है। क्षेत्र के बारह देश इस अभियान का हिस्सा हैं: बारबाडोस, ब्राज़ील, चिली, कोलंबिया, कोस्टा रिका, ग्रेनाडा, इक्वाडोर, पनामा, पेरू, डोमिनिकन गणराज्य, सेंट लूसिया और उरुग्वे।

 

#करेंगे संग प्लास्टिक प्रदूषण से जंग 5 जून को मनाए जा रहे विश्व पर्यावरण दिवस का विषय है।

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