Monday, March 5, 2018 समुद्री प्लास्टिक: प्रवाल भित्तियों के लिए एक नया और बढ़ता हुआ ख़तरा

इस बात के नए सबूत मिल रहे हैं कि मानव का प्लास्टिक के प्रति जुनून दुनिया के प्राकृतिक आश्चर्यों में शामिल किए जाने वाली प्रवाल भित्तियों के लिए जहर बन रहा है।

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इस बात के नए सबूत मिल रहे हैं कि मानव का प्लास्टिक के प्रति जुनून दुनिया के प्राकृतिक आश्चर्यों में शामिल किए जाने वाली प्रवाल भित्तियों के लिए जहर बन रहा है।

प्रवाल भित्तियां केवल एक सुंदर कलाकृति ही नहीं हैं, वे जीवित साँस लेते हुए पारिस्थितिक तंत्र हैं जिनमे जीवन फलता-फूलता है। हालांकि वे दुनिया की कुल महासागरीय सतह के 0.1 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र में फैली हुई हैं लेकिन वे 25 प्रतिशत समुद्री प्रजातियों का एकमात्र आवास हैं; वे चक्रवात और चढ़ते समुद्रों के विरुद्ध प्राकृतिक बाधा के रूप में कार्य करती हैं, इस प्रकार वे तटवर्ती समुदायों की सुरक्षा के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण हैं; और 27.5 करोड़ लोग अपने भोजन और आजीविका के लिए सीधे इन्हीं पर निर्भर हैं।

पर फिर भी प्रवाल भित्तियों को कई तरफ से हमले झेलने पड़ रहे हैं। पिछले 30 वर्षों में हम जलवायु परिवर्तन, अत्यधिक संख्या में मछलियां पकड़ने और कई स्थलीय गतिविधियों के कारण गर्म होते समुद्रों के प्रभावों के चलते दुनिया की 50 प्रतिशत प्रवाल भित्तियां खो चुके हैं। हालांकि एक नए अध्ययन से पता चला है कि प्लास्टिक भी उनके लिए एक बड़ा ख़तरा बनकर उभर रहा है।

Ocean plastic
हर वर्ष 80 लाख टन से भी अधिक प्लास्टिक महासागरों में पहुँचता है। (चित्र का स्रोत: पिक्साबे (Pixabay))

हर वर्ष लगभग 80 लाख टन से भी अधिक प्लास्टिक महासागरों में  बहाया जा रहा है –जोकि हर मिनट  प्लास्टिक के कचरे से भरे ट्रक को खाली करने के बराबर है। हम 1960 के दशक की तुलना में आज 20 गुना अधिक प्लास्टिक बना रहे हैं। अगर प्लास्टिक के उपयोग की यही दर रही, तो हम वर्ष 2050 तक 33 अरब टन प्लास्टिक और बना चुके होंगे जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा महासागरों को अपना आख़िरी पड़ाव बनाएगा और सदियों तक वहीं बना रहेगा।

इस वर्ष साइंस में प्रकाशित हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 159 प्रवाल भित्तियों के एक सर्वेक्षण में, शोधकर्ताओं के आकलन के अनुसार प्रवाल भित्तियों में 11.1 अरब प्लास्टिक की वस्तुएं फंसी हुई हैं, जो एक भयावह आँकड़ा है। अनुमान है कि इस आँकड़े में मात्र अगले सात वर्षों में 40 प्रतिशत तक की और वृद्धि हो जाएगी।

हमने भित्ति का निर्माण करने वाले 1,24,000 अलग-अलग प्रवालों का आंकलन किया था। प्लास्टिक से लदे प्रवालों में से 84 प्रतिशत प्रवाल, रोगों के ख़तरे का सामना कर रहे थे, जबकि प्लास्टिक से मुक्त प्रवालों में यह मात्र 4 प्रतिशत था। प्लास्टिक कचरा प्रवाल को बेहद ज़रूरी ऑक्सीजन तथा प्रकाश से वंचित कर देता है और ऐसे विषाक्त पदार्थ छोड़ता है जो वायरस और बैक्टीरिया को आक्रमण करने के लिए सक्षम बना देते हैं।

मरीन पॉल्युशन बुलेटिन नामक शोध-पत्र में अक्तूबर 2017 में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में, वैज्ञानिकों ने समुद्री जीवों द्वारा प्लास्टिक निगले जाने के मामले में एक चिंताजनक मामला दर्ज किया। इस बात के ढेरों सबूत मौजूद हैं कि समुद्री जीव प्लास्टिक कचरे को, ख़ासतौर पर माइक्रोप्लास्टिक को, ग़लती से भोजन समझकर निगल रहे हैं जो उनके लिए जानलेवा है।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने देखा कि प्रवाल छोटे-छोटे प्लास्टिक कणों को भोजन समझने की ही ग़लती नहीं कर रहे थे; वे प्लास्टिक के आस-पास तैरने पर एक सोची-समझी फ़ीडिंग प्रतिक्रिया भी दिखा रहे थे। दूसरे शब्दों में कहें तो, प्लास्टिक में मौजूद रासायनिक यौगिकों में कोई बेहद ख़तरनाक आकर्षण है। शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि संक्रमण और रोग और न फैले इसके लिए ज़रूरी है कि इस ख़तरनाक आकर्षण को बेहतर ढंग से समझा जाए।

इंटरनेशनल कोरल रीफ़ इनीशिएटिव (आईसीआरआई) ने 2018 को अंतरराष्ट्रीय प्रवाल-भित्ति वर्ष घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएन एन्वायरन्मेंट) साथी संगठनों के साथ मिलकर प्रवाल भित्तियों के मूल्य एवं महत्व तथा उनके अस्तित्व पर छाये संकट के बारे में जागरुकता फैलाने, और उनके संरक्षण की दिशा में कदम उठाने के लिए लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य के साथ कार्य कर रहा है। 

#प्लास्टिकप्रदूषणकोहराएं विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय है। एक बार उपयोग में आने वाले  प्लास्टिक से नाता तोड़ने के आंदोलन से जुड़ें। 

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