Thursday, May 24, 2018 समुद्र से प्लास्टिक इक्ट्ठा करना

पिछले 10 महीनों से, केरल में मछुआरे भारत की दक्षिणी तटरेखा पर एक अनोखी गतिविधि में जुटे हुए हैं। हर दिन समुद्र से वे मछलियां पकड़कर तो लाते ही हैं, साथ में भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा भी वापस लेकर आ रहे हैं।

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पिछले 10 महीनों से, केरल में मछुआरे भारत की दक्षिणी तटरेखा पर एक अनोखी गतिविधि में जुटे हुए हैं। हर दिन समुद्र से वे मछलियां पकड़कर तो लाते ही हैं, साथ में भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा भी वापस लेकर आ रहे हैं।

अपने प्राचीन समुद्र तटों, मुहानों और वन्यजीवन के लिए प्रसिद्ध केरल की तटरेखा लगभग 600 किलोमीटर लंबी है। भारत के सर्वोच्च मछली उत्पादकों में गिने जाने वाले इस क्षेत्र के लगभग दस लाख से अधिक निवासी अपनी आजीविका के लिए मछली पालन पर निर्भर हैं। लेकिन समुद्री प्रदूषण के बढ़ते स्तर, और खास कर प्लास्टिक प्रदूषण की वजह से मछलियों के उत्पादन में हाल के दिनों में कमी देखने को मिली है।

पिछले वर्ष, केरल की मत्स्य उद्योग मंत्री, जे. मर्सीकुट्टी अम्मा ने ठान लिया कि बस अब और नहीं।  उनके दिशा-निर्देश में, राज्य सरकार ने एक सफाई अभियान शुरू किया जिसे  सुचित्व सागरम, या स्वच्छ समुद्र नाम दिया गया।

जब नौकाओं से समुद्र में जाल फेंके जाते हैं, तो उनमें मछलियों के साथ-साथ भारी मात्रा में प्लास्टिक भी फंसकर आ जाता है। पहले वे प्लास्टिक के कचरे को वापस पानी में फेंक देते थे पर अब  सुचित्व सागरम अभियान से प्रशिक्षण मिलने के बाद, मछुआरे प्लास्टिक को  वापस तट पर ला रहे हैं।

समुद्र से लाए जाने के बाद, इस प्लास्टिक के कचरे को बंदरगाह पर एकत्रित किया जाता है।  फिर, प्लास्टिक के कचरे को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने वाली मशीन में डाला जाता है, और फिर इसे रोड को समतल बनाने के लिए उपयोग किया जाता है।

इस पहल के तहत अभी पांच नौकाएं और स्थानीय मछुआरा समुदाय के 28 लोग सक्रिय हैं - जिनमें से दो को छोड़कर सभी महिलाएं हैं।

जॉनसन प्रेमकुमार जो सुचित्व पहल के अंतर्गत प्रशिक्षण के कार्यक्रम अधिकारी हैं ने बताया “अब तक वे 10 टन प्लास्टिक की थैलियां और प्लास्टिक की बोतलें और 15 टन फेंक दिए जाने वाले जाल, प्लास्टिक की रस्सियां और अन्य प्लास्टिक पदार्थ समुद्र से निकाल चुके हैं"। “भले ही यह मछुआरों का एक छोटा समूह है, पर वे समुद्र को 25 टन प्लास्टिक कचरे से मुक्ति दिला चुके हैं।”

फेंक दिए जाने के बाद प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें और अन्य कचरा जलीय इकाइयों तथा भराव क्षेत्रों में पहुंचता है, जहां से वे अक्सर समुद्र में पहुंचकर समुद्री विविधता के लिए खतरा उत्पन्न करते हैं।

मछलियां, और गल (गिल) से पानी भीतर लेने वाले अधिकांश अन्य सभी समुद्री जीवों में बेहद सूक्ष्म आकार के प्लास्टिक के कचरे को निगल लेने का जोखिम अधिक बना हुआ है। इस पहल के माध्यम से, केरल के मछुआरे न केवल समुद्र की सफाई कर रहे हैं बल्कि वे अपनी आजीविका सुनिश्चित करने वाले पारिस्थितिक तंत्र (इको सिस्टम) को भी सुरक्षित कर रहे हैं।

#करेंगे संग प्लास्टिक प्रदूषण से जंग  विश्व पर्यावरण दिवस 2018 का विषय है।   

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