Sunday, June 3, 2018 सैनिटरी उत्पादों को अधिक सतत बनाने वाली समोआ की महिला व्यवसायी से मुलाकात

माहवारी।

लेख

माहवारी।

दुनिया की आधी जनसंख्या माहवारी से गुज़रती है। फिर भी माहवारी के बारे में शायद ही कभी कोई चर्चा देखने को मिलती है। महिला हाइजीन उत्पादों के पर्यावरणीय प्रभावों पर चर्चा तो और भी कम देखने को मिलती है।

एक सामाजिक प्रतिबंध के अलावा, माहवारी से जुड़े उत्पाद भारी मात्रा में कचरा भी उत्पन्न करते हैं। प्रत्येक वर्ष लगभग 20 अरब सैनिटरी नैपकिन, टैंपोन और एप्लिकेटर उत्तरी अमेरिका के भराव क्षेत्रों में फेंके जाते हैं। भारत में आधे से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां उपयोग के बाद फेंक दिए जाने वाले नैपकिन का उपयोग करती हैं। परिणामस्वरूप, प्रतिवर्ष 44 अरब 9 करोड़ पैड फेंके जाते हैं। प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों में जहां कचरा अक्सर महासागर में पहुंचता है यह एक स्पष्ट वर्तमान समस्या है। प्लास्टिक की थैली में लिपटा हुआ, एक महिला हाइजीन उत्पाद जैविक रूप से नष्ट होने में कई सदियां लगा देता है।

उपयोग के बाद फेंक दिए जाने वाले महिला हाइजीन उत्पादों को बनाने का कार्बन फ़ुटप्रिंट भी काफी अधिक है: प्रतिवर्ष 15 अरब टन ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन - जो 35 अरब बैरल तेल जलाने के बराबर है।

माहवारी से जुड़े प्रतिबंधों के साथ ही व्यवसाय के निर्णयकर्ताओं से महिलाओं की गैर मौजूदगी की वजह से नए उत्पादों का विकास नहीं हो पा रहा है। 15 अरब डॉलर का उद्योग होने के बावजूद भी, महिला हाइजीन के क्षेत्र में पिछले 80 वर्षों में बहुत कम नई खोजें देखने को मिली हैं।

एंजेलिका सलेले जैसी महिला उद्यमियों के उभरने के साथ यह परिस्थिति बदल रही है। वह संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण के एशिया पैसिफ़िक लो-कार्बन लाइफ़स्टाइल्स चैलेंज के 10 विजेताओं में से एक हैं। अपनी व्यावसायिक सहयोगी इसाबेल रैश के साथ मिलकर, वह समोआ, और संपूर्ण प्रशांत क्षेत्र में, अपने स्टार्ट-अप माना केयर प्रोडक्ट्स के द्वारा बनाए जाने वाले सस्ते, टिकाऊ और दोबारा उपयोग में आने वाले महिला हाइजीन उत्पादों की मार्केटिंग करने वाली पहली महिला हैं। उनका व्यवसाय महिलाओं और लड़कियों के लिए, विषाक्त पदर्थों से बने एक बार उपयोग में आने वाले, और उपयोग के बाद फेंक दिए जाने वाले सैनिटरी पैड की जगह सस्ते, पर्यावरण के अनुकूल विकल्प मुहैया कराता है। उनकी योजना महिला दर्जियों की एक टीम को रोज़गार प्रदान करने की है जो उत्पाद का निर्माण करेंगी।

संयुक्त राष्ट्र ने चैलेंज की विजेता, सलेले से बातचीत करके यह जानने की कोशिश की कि महिलाओं की आवश्यकताओं को पूरा कर #करेंगे संग प्लास्टिक प्रदूषण से जंग के लक्ष्य को कैसे पूरा किया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण: जब आपने इस समस्या और इसके समाधान के बारे में महिलाओं से पहली बार बातचीत की, तो आपको क्या सुनने को मिला?

सलेले: महिलाओं और लड़कियों के अलग-अलग समूहों के लिए माहवारी स्वच्छता से जुड़ी समस्या और उत्पाद तक पहुंच अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, उच्च आय वर्ग की महिलाएं सुविधा, समय और संबंधित पर्यावरणीय प्रभावों के बारे में अधिक सोचती हैं। पर्यावरण के प्रति चिंता ज़ाहिर करने वाली महिलाएं संरक्षण या पर्यावरण की सुरक्षा और वकालत की पृष्ठभूमि से थीं या वे इन क्षेत्रों में अपना कैरियर स्थापित कर चुकी थीं। चिंता प्रकट नहीं करने वालों ने इस पर केवल तब विचार किया जब उन्हें पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में बताया गया।

मध्यम से निम्न आय वर्ग वाली महिलाओं के लिए मुख्य चिंता का विषय कीमत और पहुंच है। ये महिलाएं पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में कम जानती थीं, और अधिकांश ने माहवारी के मुद्दे पर चर्चा करते हुए पर्यावरण को ज़रा भी संज्ञान में नहीं लिया। इसे कपड़े के टुकड़ों के अधिक इस्तेमाल, और प्लास्टिक कचरे तथा महिला हाइजीन उत्पादों से इनके संबंध के बारे में शिक्षा की कमी के साथ जोड़कर देखा जा सकता है। समोआ के कुछ हाई स्कूलों में प्रजनन और माहवारी के बारे में पढ़ाया तो जाता है परंतु यह पढ़ाई स्थानीय संदर्भ में नहीं होती है और इसमें स्वच्छता और प्रबंधन शामिल नहीं होते हैं। आंकड़े एकत्रित करते समय तथा शोध के दौरान यह भी ध्यान दिया जाएगा कि क्या इस बारे में घर पर माताओं और बेटियों के बीच में चर्चा होती है।

Angelica Salele
अपने उत्पाद के साथ एंजेलिका सलेले (दाएं) और उनकी व्यावसायिक सहयोगी इसाबेल रैश (फ़ोटो सौजन्य एंजेलिका सलेले)।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण: आपका व्यवसाय माहवारी से जुड़े प्रतिबंधों को कैसे तोड़ता है? दृष्टिकोण के इस बदलाव में क्या पुरुष शामिल हो सकते हैं?

सलेले: माना केयर खुले में चर्चाएं आयोजित कर माहवारी को सामान्य बातचीत का हिस्सा बना रहा है, जिनमें समस्याओं, तथा उनके व्यावहारिक और पर्यावरण के अनुकूल समाधान प्रदान करने पर चर्चा की जाती है। “माना” एक पॉलीनेशियन शब्द है और कई भाषाओं में पाया जाता है। समोअन और हवाइयन से लेकर माओरी जैसी प्रशांत महासागर के कई द्वीपों की अन्य भाषाओं में, "माना" शब्द का अर्थ समान है। इन भाषाओं में इस शब्द का अर्थ है, शक्ति। हमारे ब्रांड के नाम के रूप में इस शब्द को चयनित करने का कारण यह था कि यह मासिक स्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक पहलू के संदर्भ में महिलाओं को सशक्त करने की हमारी इच्छा को प्रत्यक्ष रूप से प्रतिबिंबित करता है। ये पहलू आर्थिक भी हो सकते हैं और पर्यावरण से संबंधित भी।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण: आपके मुताबिक दोबारा उपयोग में आने वाले पैड अपनाने से महिलाओं और लड़कियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

सलेले: हमने महिलाओं और सरकारी कर्मियों से बातचीत के दौरान यह जाना है कि समोआ के दूरस्थ क्षेत्रों में लड़कियां माहवारी के दौरान स्कूल नहीं जा पाती हैं, क्योंकि समुचित मासिक हाइजीन उत्पादों तक उनकी पहुंच नहीं होती है। हमें पता है कि कई अन्य विकासशील देशों पर भी यह बात लागू होती है, लेकिन शायद यह इकलौता क्षेत्र है जहां पर इस समस्या के समाधान सबसे ज्यादा सीमित हैं। हमारा उत्पाद अपने आप में पहला उत्पाद है जिसे स्थानीय स्तर पर समोआ में बनाया जाता है। बाज़ार में अभी उपलब्ध, उपयोग के बाद फेंक दिए जाने वाले उत्पादों के सस्ते विकल्प उपलब्ध कराकर हम सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लड़कियों को स्कूल से अनुपस्थित न होना पड़े। कई कारणों के चलते लड़कियों को ये महंगे उत्पाद उपलब्ध नहीं हैं। लड़कियों का स्कूल में बना रहना सुनिश्चित करने के अलावा, हम महिलाओं, खासकर गरीब महिलाओं की मदद करना चाहते हैं, जिन्हें ये उत्पाद प्राप्त करने के लिए समान कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, ताकि वे कार्य करना जारी रख सकें, समाज में योगदान कर सकें और एक सामान्य जीवन जी सकें, भले ही महीने का कोई भी समय चल रहा हो।

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण: अपने पर्यावरण की रक्षा का ज़िम्मा संभालने के लिए हम आपके जैसी अन्य महिलाओं और लड़कियों को किस तरह प्रेरित कर सकते हैं? आप उन महिलाओं और लड़कियोंतथा पुरुषों और लड़कोंको क्या सलाह देंगी जो निम्न कार्बन स्तर तथा प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त भविष्य का नेतृत्व करना चाहते हैं?

सलेले: कोई भी हो, अपने पर्यावरण की सुरक्षा करने में हम सबकी एक भूमिका है। और सबसे पहले हमें यह स्वीकार करना होगा कि यह हमारी अकेले की ज़िम्मेदारी है, और यह सबसे महत्त्वपूर्ण विरासत है जो हम अपने बच्चों को दे सकते हैं। हम महिलाओं में निःस्वार्थ की भावना प्राकृतिक रूप से होती है, और हम दूसरों, खासकर अपनी संतानों का पोषण करती हैं और उनका ख्याल रखती हैं। हमें अपनी इस प्रवृत्ति का लाभ उठाना होगा और खासकर विकासशील क्षेत्रों में महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाना होगा ताकि वे अपने खुद के घरों, समुदायों और देश में अपनी प्रेरणाशक्ति का उपयोग कर अपने बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकें। पर्यावरण का नेता कोई भी बन सकता है, लेकिन इतिहास गवाह है कि सर्वश्रेष्ठ नेता वही होता है जिसके नेतृत्व का मकसद दूसरों की सेवा करना होता है, न कि स्वयं की।

मैंने जो कुछ भी अच्छा किया है, उसके पीछे मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा मेरे बच्चे रहे हैं। पर मुझे पता है कि यह भावना केवल मुझमें ही नहीं है बल्कि दुनिया भर के माता-पिता में यह भावना होती है। मेरे लिए, अपने पर्यावरण की रक्षा करने का मतलब है अपने बच्चों की रक्षा करना – तो यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों नहीं है?

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: जेनेट सलेम, janet.salem@un.org

एशिया पैसिफ़िक लो कार्बन लाइफ़स्टाइल्स चैलेंज के बारे में अधिक जानें।

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